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संत हिरदाराम नगर :- श्रृंखला में संत हिरदाराम नगर की विवेकानंद बस्ती का विषाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन...
विवेकानंद बस्ती, संत हिरदाराम नगर बनी हिन्दू एकता की साक्षी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हिंदू सम्मेलनों की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला के अंतर्गत आज संत हिरदाराम नगर की विवेकानंद बस्ती का विषाल हिंदू सम्मेलन संस्कार विद्यालय में सम्पन्न हुआ जिसमें गौमाता पूजन, कन्या पूजन, हनुमान चालीसा का पाठ, भारत माता की आरती, भजनों एवं देषभक्ति गीतों का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता नितिन केकरे, संत तुलसी उदासी, शषि शर्मा, श्रद्धेय लाल साईं जी उपस्थित थे। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप निनित केकरे ने सभी का अभिवादन करते हुए कहा कि हमारा देष वीरों का देष है, सम्पन्न देष है जिसकों सोने की चिड़िया कहा जाता है,हमारे देष की सम्पन्नता की कोई तुलना नहीं है। सनातन धर्म के कारण ही 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर का निर्माण हुआ था उन्होंने देष के महापुरूषों की जीवन पर प्रकाष डालते हुए उनकी देष की आजादी में क्या भूमिका थी इसके बारे में बाताया। कार्यक्रम में उपस्थित संत तुलसी दास ने कहा कि हम सब हिन्दू है जिसकी व्यापक विचारधारा प्रेम और सद्भाव होता है हम सब की जिम्मेदारी है कि हम सनातन धर्म के लिए समय निकाले, अंत में उन्होने कहा कि ‘‘जात-पात की करों विदाई, हम सब हिन्दू-हिन्दू भाई-भाई’’। कार्यक्रम में उपस्थित शषि शर्मा जी ने अपने उद्धबोधन में भारत माता की जय एवं वन्दे मातृरम के साथ सभी माताओं बहनों को नमन करते हुए कहा कि कर्म के द्वारा ही भविष्य निर्घारित होता है, स्वबोध, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण व समरसता के बताते हुए कहा कि हमें विदेषी चीजों का उपयोग न करते हुए स्वदेषी वस्तुओ का उपयोग करना चाहिए, हमें विदेष चलन को न अपनाते हुए देष के चलन को अपनाना चाहिए, हमें अपने कार्यक्रमों को देष की संस्कृति के अनुसार मनाना चाहिए, भेदभाव, छुआ छूत को मिटाकर सनातन धर्म को अपनाना चाहिए, एवं मोबाईल का उपयोग आवष्यकता अनुसार उचित कार्यो के लिए उपयोग करना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धेय संत श्री लाल साई जी ने सभी को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी अपने अपने बच्चों को संघ में भेजे जिससे वह हिन्दू धर्म व सनातन पद्धति को समझे क्योंकि जो धर्म को धारण करेगा, धर्म उसे धारण करेगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का मतलब है कि जन्म व मृत्यु दोनो ही भारत की सेवा के लिए समर्पित है। हमें हमेषा इस भावना का विचार करना है कि जो बोओगे वही काटोगे क्यों कि काल चक्र हमेषा चलता रहता है कुछ भी समाप्त नहीं होता, हिन्दू धर्म व सनातन धर्म हमेषा ही रहेगा। कार्यक्रम के अंत में सकल हिन्दू समाज आयोजन समिति ने आए हुए सभी अतिथियों, संतो एवं सनातनियों का आभार व्यक्त किया।


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