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संत हिरदाराम नगर :- भागवत कथा में तृतीय दिवस पर वाराह अवतार एवं कपिल-देवहूति संवाद का हुआ भावपूर्ण वर्णन.....
भोपाल। विजय नगर, लालघाटी स्थित महामृत्युंजय मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर कथा व्यास साध्वी मंजरी प्रिया जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए भगवान वाराह अवतार तथा भगवान कपिल मुनि द्वारा माता देवहूति को दिए गए दिव्य ज्ञान का रसपूर्ण वर्णन किया। समिति के मुख्य सलाहकार इंद्रदास मेंघानी ने बताया कि विजय नगर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान साध्वी मंजरी प्रिया द्वारा प्रस्तुत संगीतमय भजन एवं मधुर कीर्तन ने संपूर्ण परिसर को भक्तिमय वातावरण से ओत-प्रोत कर दिया। साध्वी मंजरी प्रिया ने भगवान वाराह अवतार का वर्णन करते हुए बताया कि सृष्टि के प्रारंभ में दैत्य हिरण्याक्ष ने अपने बल और अहंकार के प्रभाव से पृथ्वी को रसातल में डुबो दिया था। तब समस्त देवताओं, ऋषियों एवं मुनियों की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने दिव्य वाराह रूप धारण किया। भगवान वाराह महासागर में उतरे और अपनी विशाल दाढ़ों पर पृथ्वी माता को धारण कर उन्हें पुनः उनके स्थान पर स्थापित किया। इसके बाद भगवान ने हिरण्याक्ष के साथ घोर युद्ध कर उसका संहार किया और धर्म की पुनः स्थापना की। यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि भगवान अपने भक्तों एवं सृष्टि की रक्षा के लिए किसी भी रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश करते हैं तथा धर्म की विजय सुनिश्चित करते हैं। कथा में आगे भगवान कपिल मुनि एवं माता देवहूति के संवाद का वर्णन करते हुए साध्वी मंजरी प्रिया जी ने कहा कि भगवान कपिल ने अपनी माता को सांख्य योग, आत्मज्ञान एवं भक्ति मार्ग का उपदेश दिया था। उन्होंने बताया कि मनुष्य यदि अपने मन को भगवान की भक्ति में लगाकर निष्काम भाव से कर्म करे तथा विषय-विकारों से दूर रहे, तो वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर परमात्मा की प्राप्ति कर सकता है। सच्ची भक्ति, सत्संग एवं आत्मचिंतन ही जीवन को सफल और सार्थक बनाते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान के दिव्य नाम-संकीर्तन, जयघोष एवं भजनों पर भावविभोर होकर भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। संपूर्ण वातावरण श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास से परिपूर्ण रहा। यजमान आनंद सबधाणी एवं परिवार की ओर से कथा के उपरांत महाआरती संपन्न हुई तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आगामी दिवसों की कथा में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।

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