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संत हिरदाराम नगर :- संस्कार विद्यालय में शहीद हेमू कालानी के जन्मदिवस एवं शहीद भगत सिंह, राजगुरू....
एवं सुखदेव के शहीदी दिवस पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें याद किया गया।संस्कार विद्यालय में शहीद हेमू कालानी के जन्मदिवस एवं शहीद भगत सिंह, राजगुरू एवं सुखदेव के शहीदी दिवस पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए उन्हे याद किया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम संस्था के अध्यक्ष सुषील वासवानी, सचिव बसंत चेलानी, कोषाध्यक्ष चन्दर नागदेव, पत्रकार सुरेष जसवानी द्वारा हेमू कालानी, भगत सिंह, राजगुरू एवं सुखदेव के छाया चित्र पर पुष्पजंलि अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी गई सर्वप्रथम संस्था के सचिव बसंत चेलानी ने आए हुए सभी का स्वागत करते हुए कहा कि हम हमेषा महापुरूषों की जीवनी एवं शहादत दिवस को मनाते है और यह हम इसलिए मनाते है ताकि हमें उनकी शहादत और देष के लिए क्या-क्या बलिदान दिया उनके बारे में जान सके, आज हम जो आजादी की सांस ले रहे तो ऐसे ही आजाद नहीं उसके लिए हमारे कई महापुरूषों ने बलिदान दिया है और हमें यदि आगे भी हमें स्वतंत्र रहना है, तो हमें जागरूक रहना पड़ेगा। संस्था के अध्यक्ष सुषील वासवानी ने भारत माता की जय के नारों के साथ कहा कि वास्तव में इतिहास जो है हमारे आने वाले मार्ग को प्रषस्त करता है और हम इतिहास को भूल जाएंगें तो हो सकता है कि हमारे आने वाली राह कठिन होगी, उन्होंने कहा कि आज शहीद हेमू कालानी की जयंती है, जो एक सिंधी थे और उन्होंने देष के लिए अपना बलिदान कर दिया लेकिन अब सिंधी जाति व्यापार में व्यस्त है, बहुत सहज है, सबसे स्नेह करती है लेकिन मैदान में नहीं पर अब वह धीरे-धीरे मैदान में आ रही है। मैं शहीद हेमू कालानी, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव के चरणों में नमन करता हूँ जिसकी वजह से हम लगभग 79 सालों से आजादी की सांस ले रहें है, उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि हमें अपने घरों में अपने बच्चों के सामने इन बातों के बारे में चर्चाकरनी चाहिए ताकि उन्हें भी इस बारें में जानकारी मिल सकें। कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार सुरेष जसवानी ने कहा कि हेमू कालानी ने देष के लिए जो बलिदान किया, लेकिन सिंधियों का योगदान केवल यहीं तक सीमित नहीं है, 1857 में जब पहला स्वतंत्रता संग्राम जो झांसी की रानी के नेतृत्व में हुआ उसमें बारूद खाने को संभालने वाला भी एक सिंधी था खोकोमल, और आज पता चला कि देष के लिए जान देने वाले शहीद हेमू कालानी के साथ सुषील वासवानी के पिताजी नारायणदास वासवानी ने भी काम किया था और वे उनके मित्र थे। उन्होंने कहा कि चाहे सिंधी समाज का आम नागरिक हो या सिंधी समाज हो, हम शुरू से लड़ाकू नहीं थे यदि हम लड़ाकू होते तो अंग्रेज हमारे देष में नहीं पनप पाते। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य आर. के. मिश्रा, कोर्डिनेटर सीमा शर्मा, मोन्टेसरी इन्चार्ज प्रियांषी आडवानी एवं समस्त षिक्षक-षिक्षिकाओं ने शहीद हेमू कालानी, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव के छायाचित्र पर पुष्पांजंलि आर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी। कार्यक्रम के अंत में संस्था के कोषाध्यक्ष चन्दर नागदेव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए श्रद्धाजंलि अर्पित की।

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